राष्ट्रीय

आश्चर्यजनक: आंखों के जादू से रेंगते चले आते हैं सर्प, तीन बार हो चुका है मौत से सामना

  • आश्चर्यजनक: आंखों के जादू से रेंगते चले आते हैं सर्प, तीन बार हो चुका है मौत से सामना
    बिलासपुर। पेंड्रा के दूरस्थ वनांचल में बसे कोलानपारा में  जंगल के बीच झोपड़ी बनाकर अपनी बूढ़ी मां और दर्जनों सर्पों के साथ रहते हैं द्वारिका कोल। उन्हीं के साथ रहते हैं दर्जनों विषधर जिसका नाम सुनते ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं। यही नहीं उनकी भोजन की भी व्यवस्था भी द्वारिका ही करते हैं। सात बार विषधरों ने डसा है। तीन बार मौत के मुंह से निकलकर आया है। उनकी आंखों में ऐसा जादू कि देखते ही विषधर रेंगते चले आते हैं।
    पेंड्रा के घने जंगलों के बीच कोलानपारा स्थित है। बंजारों की बस्ती के बीच द्वारिका की झोपड़ी एकदम अलग बनी हुई है। दो कमरों की झोपड़ी उनके और उनकी मां के लिए है। इसी से सटी हुई एक बड़ी झोपड़ी बनी है। इस झोपड़ी की ओर झांकना तो दूर आसपास लोग भी नहीं फटकते। कारण है बड़े-बड़े विषधरों का बसेरा। रात का सन्नाटा हो या फिर दिन के शांत मौसम में यहां से निकलने वाले विषधरों के फुफकार से अच्छी तरह वाकिफ है। वर्तमान में द्वारिका के घर में 200 से ज्यादा विषधर हैं। जंगल कोबरा व करैत वाइपर और न जाने कितने विषधरों की आपस में दोस्ती है। पिछले करीब दो दशक से द्वारिका सहजता के साथ रह रहा है। ये विषधर उनके जीवन-यापन का साधन भी नहीं है। इसे शौक कहें या फिर इनको सुरक्षित रखने का संकल्प। सांपों को पालने के अलावा जंगल क्षेत्र में जहां से भी उनको सांप काटने की जानकारी मिलती है वह मौके पर पहुंच जाता है।
    झाडफ़ूंक नहीं उपचार पर भरोसा
    लोगों को झाड़-फूंक से बचने की नसीहत देते हुए सीधे डॉक्टर के पास इलाज के लिए जाने की सलाह देते हैं। सांपों के बीच रहने के कारण उनकी पारखी निगाहें यह जान जाती है कि किस प्रजाति के सांप ने व्यक्ति को काटा है। आलम यह है कि आसपास के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में इलाज के लिए जब कोई पहुंचता है तो चिकित्सक पहले द्वारिका को याद करते हैं। द्वारिका संबंधित व्यक्ति को देखकर यह बता देता है कि उसे किस प्रजाति के सांप ने काटा है। द्वारिका अब तक पांच हजार से अधिक सर्प पकडक़र उन्हें सुरक्षित जंगल में छोड़ चुका है। विषैले सांपों को वह अपने पास रख लेता है। सांपों को पालने के दौरान वह सांपों के दांत को भी नहीं तोड़ता।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Close