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शहीद बेटे के साथ सुपुर्द-ए-खाक हुआ पिता, आंसू भरे हजारों आंखों ने किया विदा

नई दिल्‍ली, जेएनएन। हम सभी अगर अमन-चैन से अपनी आम जिंदगी गुजार रहे हैं तो सिर्फ सीमा पर तैनात जवानों की वजह से, जहां हालिया समय में पड़ोसी देश के साथ तनाव इस कदर बढ़ गया है कि युद्ध जैसे हालात पैदा हो गए हैं। आए दिन पाकिस्‍तान की 'नापाक' हरकतें जारी हैं। घुसपैठ के प्रयासों के बीच गोलियां बरस रही हैं। भारतीय जवान भी मुंहतोड़ जवाब दे रहे हैं। आतंकियों को ढेर कर रहे हैं। मगर इस बीच हम अपने जवानों को भी खो रहे हैं। सुंजवां आतंकी हमले में कई जवान शहीद हो गए, जिन पर पूरे देश को गर्व है।

जम्‍मू-कश्‍मीर में मंगलवार को कई शहीद जवानों को उनके पैतृक गांवों में सुपुर्द-ए-खाक किया गया। इनमें एक शहीद बेटे के साथ पिता को भी दफन किया गया। दक्षिणी कश्मीर के त्राल क्षेत्र के शहीद मोहम्मद इकबाल शेख और हमले में मारे गए उनके पिता मोहिउद्दीन शेख के पार्थिव शरीर जब दोपहर बाद उनके पैतृक गांव पहुंचे तो सभी गमगीन हो गए। इकबाल (32) की पत्नी शबनम का रो-रोकर बुरा हाल था। वह 12 साल से सेना में थे। दो साल पहले ही शादी हुई थी। उनका 18 माह का बेटा है। इकबाल की पहली बार गृह राज्य में पोस्टिंग हुई थी। इसलिए उन्होंने पिता को कैंप में साथ रहने खासतौर से बुलाया था।

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अनंतनाग में भी यही मंजर था, जब वहां शहीद मंजूर अहमद देवा का पार्थिव शरीर पहुंचा। उन्हें भी हजारों लोगों ने नम आंखों के साथ विदा किया। उत्तरी कश्मीर के कुपवाड़ा जिले के लोलाब व हैहामा में भी शहीद हबीबुल्लाह कुरैशी व मोहम्मद अशरफ मीर को हजारों लोगों ने अंतिम विदाई दी।

शहीदों के नमाज-ए-जनाजे में हजारों लोगों ने शामिल होकर नम आंखों से विदाई दी। जनाजे में शामिल लोगों में पाकिस्तान के खिलाफ आक्रोश देखा गया। इस दौरान पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे गूंजे। जैश-ए-मोहम्मद के प्रभाव वाले त्राल में लोग आतंकियों का खुलकर विरोध करते दिखे। इसी त्राल में 2016 में आतंकी बुरहानी वानी की मौत पर हिंसा भड़क उठी थी। सुंजवां में एक और जवान का शव मिला, कुल छह शहीद सुंजवां में सेना के कैंप पर फिदायीन हमले में शहीदों की संख्या छह हो गई है।

By Pratibha Kumari

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