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नोटबंदी और जीएसटी का नकारात्मक असर खत्म, बाजार में लौटेगी रौनक

नोटबंदी और जीएसटी का नकारात्मक असर खत्म, बाजार में लौटेगी रौनक कारोबारियों के अनुसार इस साल निवेशों में बढ़ोतरी होने पर उत्पादन, मांग और आपूर्ति आदि में वृद्धि होगी।

नई दिल्ली, [सतीश सिंह]। वित्त वर्ष 2017-18 में आर्थिक विकास की दर 6.5 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है, जो मोदी सरकार के कार्यकाल में सबसे कम है। इसका कारण वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) और नोटबंदी को माना जा सकता है। खरीफ उत्पादन में कमी आने से कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर घटकर आधी रह गई है। जीएसटी से पहली और दूसरी तिमाही में विनिर्माण पर असर पड़ा है। इसकी वृद्धि दर पूरे साल में 4.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि पिछले साल 7.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई थी। इसकी वजह से शुद्ध कर संग्रह में महज 10.9 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जबकि पिछले वित्त वर्ष में 12.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी।

सार्वजनिक प्रशासन, रक्षा और अन्य क्षेत्रों की वृद्धि दर के घटकर 9.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जिसका अर्थ हुआ कि राजकोषीय घाटे को काबू में रखने के लिए सरकार व्यय को नियंत्रित करने की कोशिश कर रही है, जो नवंबर में बजट अनुमान की सीमा को पार कर गया था। वैसे, निवेश के मोर्चे पर सुधार के संकेत दिख रहे हैं और सकल स्थायी पूंजी निर्माण पिछले साल के 2.4 प्रतिशत से बढ़कर 4.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है। चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में जीडीपी वृद्धि 7 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान है। चालू वित्त वर्ष के पहले तीन महीनों में जीडीपी वृद्धि दर महज 5.7 प्रतिशत रही थी, लेकिन दूसरी तिमाही में यह 6.3 प्रतिशत रही।

मुख्य सांख्यिकीविद टीसीए अनंत ने कहा कि जीडीपी वृद्धि चौथी तिमाही और बाद के महीनों में 7 प्रतिशत से अधिक रह सकती है। इक्रा के अदिति नायर ने भी कहा कि अग्रिम अनुमान को कम करके दिखाया गया है, क्योंकि अभी पूरे साल का आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। अदिति नायर के मुताबिक चालू वित्त वर्ष में जीवीए वृद्धि दर 6.5 प्रतिशत एवं जीडीपी की वृद्धि दर 6.7 प्रतिशत रह सकती है।

इसमें दो राय नहीं है कि वर्ष 2017 में नोटबंदी और जीएसटी के कारण कारोबारियों के लिए अच्छा नहीं रहा, लेकिन इस साल कारोबार की स्थिति अच्छी रहेगी, ऐसी उम्मीद की जा सकती है, क्योंकि नोटबंदी और जीएसटी दोनों का नकारात्मक असर लगभग खत्म हो चुका है और नए साल में बाजार में मांग व आपूर्ति की दशा एवं दिशा दोनों के बेहतर रहने की उम्मीद है। नए साल में सरकार की योजना ज्यादा से ज्यादा रोजगार सृजन करने की है। इसके लिए सरकार इस साल नई रोजगार नीति पेश करने वाली है, जिससे रोजगार सृजन में बेहतरी आएगी। कारोबारियों का भी मानना है कि जीएसटी से उनका काम आसान हुआ है। वैसे, अभी भी कुछ कारोबारियों के बीच जीएसटी को लेकर ऊहापोह की स्थिति बनी हुई है। ऐसे कारोबारियों का कहना है कि अभी भी जीएसटी की तस्वीर पूरी तरह से साफ नहीं हुई है।

हालांकि वे इस बात से सहमत हैं कि जीएसटी देश और कारोबार के लिए बहुत अच्छा है, लेकिन इसके कार्यान्वयन संबंधी चुनौतियों को दुरुस्त एवं पूरी प्रक्रिया का सरलीकरण किया जाना शेष है। स्थिति में बेहतरी के लिए सरकार इस दिशा में सुधारात्मक कार्य कर रही है और जल्द ही इस दिशा में बेहतर परिणाम दिखेंगे की आशा की जा सकती है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 नवंबर, 2016 को नोटबंदी की घोषणा की थी, जिससे कारोबारियों की बिक्री एवं मुनाफे पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा था। असंगठित क्षेत्र में लोगों को नौकरियां गंवानी पड़ी थी, लेकिन हालात में सुधार आने के बाद कारोबार बेहतर होने लगे हैं। कारोबारियों का मानना है कि इस साल निजी एवं सरकारी दोनों तरह के निवेशों में बढ़ोतरी होगी, जिससे उत्पादों के निर्माण, मांग, आपूर्ति आदि में वृद्धि होगी। इस आधार पर कारोबारी आशान्वित हैं कि इस साल कारोबार में अच्छी वृद्धि होगी। नए साल में अर्थव्यवस्था की रफ्तार 7.5 प्रतिशत से अधिक रहेगी। टायर निर्माता सिएट के प्रबंध निदेशक अनंत गोयनका के अनुसार देश में कारोबारी माहौल में सुधार आने से कारोबारी उत्साहित हैं। कारोबारियों का यह भी मानना है कि इस साल डॉलर की तुलना में रुपया मजबूत होगा।

29 दिसंबर को रुपया प्रति डॉलर 63.9 के अंक पर बंद हुआ था। वैसे, रुपया की मजबूती मूल रूप से अमेरिका में ब्याज दर की बढ़ोतरी पर निर्भर करेगा। पिछले साल एक अच्छी बात यह देखने को मिली कि कर वसूली के मामले में कारोबारियों का भयादोहन नहीं किया गया, जबकि 2016 में कारोबारियों के बीच भय का माहौल बना हुआ था। माहौल के सकारात्मक होने से इस साल के प्रस्तावित बजट से कारोबारी ढेर सारी उम्मीदें लगाए हुए हैं। 2019 में होने वाले आम चुनाव की वजह से मोदी सरकार इस साल अपना अंतिम बजट पेश करेगी। इसलिए सरकार भी सभी वर्ग की बेहतरी के लिए कुछ न कुछ जरूर करना चाहती है।

हालांकि, राजकोषीय घाटे को लेकर सरकार का रवैया थोड़ा सख्त भी है। इसलिए सरकार खर्च में कटौती करने के लिए परिस्थितियों और महंगाई के समानुपातिक नौकरीपेशा लोगों के वेतन एवं भत्ताें को संतुलित करना चाहती है।

बीते साल एनएसई निफ्टी ने 28.6 फीसद रिटर्न दिया था, जबकि बीएसई सेंसेक्स ने 27.9 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की थी। बीता साल भारतीय आइपीओ बाजार के लिए शानदार रहा था और सभी श्रेणियों में इक्विटी जारी करने के मामलों में 2016 की तुलना में 2.5 गुना की बढ़ोतरी हुई थी। नए साल में अर्थव्यवस्था में बेहतरी आ सकती है, क्योंकि नोटबंदी का नकारात्मक प्रभाव खत्म हो चुका है और जीएसटी से उत्पन्न समस्याएं भी धीरे-धीरे खत्म हो रही हैं। ऐसे में अर्थव्यवस्था के अनुकूल बजट पेश करने से आर्थिक क्षेत्र में और भी मजबूती आ सकती है।

चूंकि, वर्ष 2019 में चुनाव होना है, इसलिए, सरकार भी चाहती है कि इस साल ऐसा बजट पेश किया जाए, जिससे सबका भला हो। कह सकते हैं कि पांच जनवरी, 2018 को केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा जारी जीडीपी के अग्रिम अनुमान के आंकड़ों से घबराने की जरूरत नहीं है। ये आंकड़े वित्त वर्ष 2017-18 से जुड़े हैं। सरकार की सुधार प्रक्रिया जारी है, जिसका अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक प्रभाव पड़ना लाजिमी है।

(लेखक एसबीआइ के कॉरपोरेट केंद्र मुंबई में मुख्य प्रबंधक हैं)

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By Abhishek Pratap Singh Original Article