अमरनाथ बस हादसा : मदद के लिए सबसे पहले पहुंचे स्थानीय कश्मीरी, खून देकर बचाईं कई जानें

जम्मू-श्रीनगर हाईवे पर रविवार को अमरनाथ यात्रियों को ले जा रही बस खाई में गिर गई थी (फोटो : PTI)

खास बातें

  1. बस के खाई में गिर जाने से 17 अमरनाथ यात्रियों की मौत हो गई
  2. स्थानीय कश्मीरी युवाओं ने घटनास्थल पर सबसे पहले पहुंचकर घायलों की मदद की
  3. घायलों को अस्पताल ले जाने तक साथ रहे और उन्हें अपना खून भी दिया

श्रीनगर: अमरनाथ यात्रा सिर्फ श्रद्धालुओं के लिए ही नहीं, बल्कि स्थानीय कश्मीरियों के लिए भी बेहद अहम रही है. यह सिर्फ कमाई का ज़रिया नहीं, बल्कि भाईचारे की मिसाल रही है. रविवार को जब जम्मू-श्रीनगर हाईवे पर अमरनाथ यात्रियों को ले जा रही बस खाई में गिरी, तो मदद के लिए सबसे पहले आसपास के लोग ही पंहुचे.
जम्मू-श्रीनगर हाइवे पर बनिहाल के पास बस हादसे में 17 अमरनाथ यात्रियों की जान चली गई, लेकिन अधिकारियों के मुताबिक ये तादाद बड़ी हो सकती थी, अगर कश्मीरी नौजवान मदद के लिए नहीं आए होते और इन्होंने अपना ख़ून न दिया होता.
मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ रमेश कुमार गुप्ता ने बताया कि स्थानीय लोगों ने बड़ी मदद की और सरकारी सहायता भी जल्दी पहुंची. इस कारण घायलों को तत्काल एयरलिफ्ट करवाया गया, जिससे काफी लोगों की जान बच गई. अगर यह सब समय रहते नहीं हुए होता तो मुश्किल बढ़ जाती.
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नाशनाला, बनिहाल में हादसे की जगह 23 साल के वानी इमाद जैसे स्थानीय लड़कों ने सुरक्षा बलों के पहुंचने से काफी पहले अहम भूमिका अदा की. वानी ने बताया, हम घटनास्थल पर पहुंचे और सेना द्वारा दी गई रस्सी के सहारे नीचे उतरे. हम एंबुलेंस में उन्हें बनिहाल अस्पताल ले गए. हम सभी लड़के घायलों को खून देने के लिए तैयार थे, लेकिन वहां कोई सुविधा नहीं थी.
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स्थानीय लड़के ग्लूकोज़ लिए खड़े थे. घायलों को गर्मी से बचाने के लिए पंखा झलते रहे और उन्हें अस्पताल पहुंचाने के लिए विमानों तक ले जाने में भी मदद की. एंबुलेंस ड्राइवर जमील अहमद ने बताया, हम घायलों को एंबुलेंस के जरिये ही नहीं, बल्कि स्थानीय लोगों की गाड़ियों से भी अस्पताल लाए. 29 घायलों को अब जम्मू और श्रीनगर ले जाया गया है.
बनिहाल अस्पताल के सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर महमूद अख्तर मलिक ने कहा सैकड़ों की तादाद में स्थानीय लोग यहां आए और कहा कि हम अपने यात्री भाइयों के लिए खून देने आए हैं.
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